Rato Pana
साहित्य

आ सुन ससुराल :- कविता(भोजपुरी)

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हमरा अंगनवा के जईसन तु हमके अपनईब का
आ सुन ससुराल हमरा हियरा के डरवा मिटा पईब का

करेजा धक धक करेला ससुरा के नाव सुनके
हमर करेजा के धक धक रोक पईब का

आ सुन ससुराल………….

प्रिय पतिदेव हम पूरा खयाल राखब राउर
मने हमरा अंखिया मे देख के बतिया समझ पाईब का

आ सुन ससुराल………….

हामार सासू मां हम माई जस दर्जा देहब रउरा के
रउरा माई जईसे हमर नाखरा उठा पाईब का

आ सुन ससुराल………

सुनी ससुर जी हम बाबू जी के जईसे आदर करब राउर
रउरा ससुर से पिता बन पाईब का

आ सुन ससुराल………….

सुनी जेठ आ देवर जी अपना भईया जस आदर आ प्यार देहब रउरा दुनो के
रउरा बहिन जस प्यार हमके दे पाईब का

आ सुन ससुराल……………

प्यारी ननदीया दोस्त बनके रहब तोहरा संघे
तु हमके आपन सब से करिबी दोस्त बना पईबु का

आ सुन ससुराल……………….

सुन ससुरार अपना नेहिया से स्वर्ग बनाईब तोहके
तु हमके घरवा के लक्ष्मी बना पईब का

आ सुन ससुराल……………. प्रिया मिश्रा (मनु)

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