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धर्म/संस्कृति

बलिदान : भोजपुरी कविता

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बेटाबेटीके जईसन करेनी तैयार ।
तब काहे राखेनी कठोर विचार ।। करेनी पूरा आपन स्वार्थ ।
अनबोल्ता जीवके उपर कईके प्रहार ।।

काँहा चल जाला बेटाबेटीके जईसन प्यार ।
जेहो होले भगवानके देहल उपहार ।।
मत बनी पापी ।
याद राखी आपन मानव संस्कार ।।

देवी देवता ना माँगेनी मेवा ,मिष्ठान ।
खुश रहेनी पाके भक्तनके प्यार ।।
धर्मके नाम पर मत करी कुकर्मी काम ।
दुर करी सभे बलिदानके रिवाज ।।

✍️ नन्दकिशोर साह
कालिका माई गाउँपालिका – १ {रविदास} , पर्सा

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