बेटाबेटीके जईसन करेनी तैयार ।
तब काहे राखेनी कठोर विचार ।। करेनी पूरा आपन स्वार्थ ।
अनबोल्ता जीवके उपर कईके प्रहार ।।
काँहा चल जाला बेटाबेटीके जईसन प्यार ।
जेहो होले भगवानके देहल उपहार ।।
मत बनी पापी ।
याद राखी आपन मानव संस्कार ।।
देवी देवता ना माँगेनी मेवा ,मिष्ठान ।
खुश रहेनी पाके भक्तनके प्यार ।।
धर्मके नाम पर मत करी कुकर्मी काम ।
दुर करी सभे बलिदानके रिवाज ।।

✍️ नन्दकिशोर साह
कालिका माई गाउँपालिका – १ {रविदास} , पर्सा







