नजर से नजर के वॉर होखत रहे -२
ओही दिन से प्यार होखत रहे ।
रंग लाल दुपटा और होठ मासूम के ,
नयन तिरछी कटार होखत रहे ।
ओही दिन से …..
अजनबी रहे हवा के महक ,-२
जकडल अहसास हवादार होखत रहे ।
ओही दिन से …..
छुवे के बड़ी तलब रहे मन मे -२
नयन उनकर सर्मसार होखत रहे ।
ओही दिन से …..
पहिला मिलन रहे करीब से -२
केहू अनजान कैसे दिलदार होखत रहे ।
ओही दिन से …..
मिलल होठ से होठ जब -२
दिल उनकर बेकरार होखत रहे ।
ओही दिन से …..

मणि झा, वीरगंज






