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नजर के वार होखत रहे (भोजपुरी कविता)

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नजर से नजर के वॉर होखत रहे -२
ओही दिन से प्यार होखत रहे ।

रंग लाल दुपटा और होठ मासूम के ,
नयन तिरछी कटार होखत रहे ।
ओही दिन से …..

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अजनबी रहे हवा के महक ,-२
जकडल अहसास हवादार होखत रहे ।
ओही दिन से …..

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छुवे के बड़ी तलब रहे मन मे -२
नयन उनकर सर्मसार होखत रहे ।
ओही दिन से …..

पहिला मिलन रहे करीब से -२
केहू अनजान कैसे दिलदार होखत रहे ।
ओही दिन से …..

मिलल होठ से होठ जब -२
दिल उनकर बेकरार होखत रहे ।
ओही दिन से …..

मणि झा, वीरगंज

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