Rato Pana
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साहित्य

बाबु जी : भोजपुरी कविता

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खुनके सामान पसिना गिराई ।
सब दिन राखेनी परिवारके हँसाई ।।
ना करेनी कबहु केहुके बुराई ।
आपन दुख लुकाई छिपाई ।।

खुद अपने पुरान कपडा लगाई ।
बिना पुछले देनी सबके ईच्छा पुगाई ।।
ना देखेनी कबहु महँगाई ।
आपन दुख लुकाई छिपाई ।।

कठिन रास्ता देनी देखाई ।
जिन्दगीमे अजोरके बती जराई ।।
कबहु ना देनी मनके रोवाई ।
आपन दुख लुकाई छिपाई ।।

गलती कईला पर करके पिटाई ।
तबो ना देनी दिलसे हटाई ।।
सही रास्ता देनी बताई ।
आपन दुख लुकाई छिपाई ।।

अपनही हई हमरा खातिर भगवान् ।
अपनही हई हमर पहिचान ।।
ना छोरनी कबहु साथ बनके फरछाई ।
सब दुख दुर कईनी बनके दवाई ।।

नन्दकिशोर साह
कालिका माई गाउँपालिका -१ {रबिदास} , पर्सा

तु बाड्अ त हम बानी
तहरे से हमर अस्तीत्व बा
तहरे प्यार में डुबल बानी
तहरे मे हमर दुनिया मस्त बा

करेल्अ केतना मेहनत
हमनी के पोसे पालेला
ना देखेंल्अ दिन बा कि रात
हमनी के पेट के बारे में सोचेला

लगावेल्अ पुरान कपडा
हमनी के नयाँ खरिदेल्अ
ना देखेंल पर्व, तेहवार
दिन रात काम करेल्अ।

ना दियाई नेक तहर
जेतना तु हमनि ला करेल्अ
ना खाल खाना खुद तु
पर पेट हमनी के भरेल्अ

जब आवेला मुसीबत कवनो
तु हरदम अगाडि खडा रहेल
प्यार करेल एतना तु हमनि से
कि खुद के परवाह ना करेल्अ

तु ही हमार दुनिया हव
तुहि हमर जहान हो
तहरे में जान बसेला
तुही हमर सर के सान् हो।

दिपक पासवान , पाकाहा मैनपुर गाउपालिका ३
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