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प्यार (भोजपुरी कविता )

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केहू कूछऊ कही त तू बूझीय प्यार भईलबा
बीना बोल्ले ही सब समझे त नैनाचार भईलबा
गजबके हाल बा दिलके कि कूछ बूझाला ना मीलके
कि शक्ति बा ई देहियामे आ दिल लाचार भईलबा ।।।

दर्द अईसन ह ई दिलके दवाई काम ना करे
रहे जे आपन बढ करके उहे पईगाम ना धरे
सफाई दी सभे तोहे की तोहर प्यार सच्चा बा
उहे तोहराके पीटवाई सघें तहरा घरे जाके ।।

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समुन्दर ह ई फिरभी सभे तैरेके चाहेला
केहू डूबूकी लगावेला केहू नीकल ना पावेला
कि दरिया ह मोहबतके की फिरभी नापेला सभे
केहू डूबके ना नीकले केहू नीकल ना पावेला ।।

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भईल बदनाम बा एमे जे भी प्यार कईले बा
केहू घर छोडके भागल केहू घरमे सतईले बा
कि अबतक ना केहू बाचल ना केहू बचईले बा
केहू थूनामे घेराईल केहू अंस्थीत्व मिटईलेबा।।

केहू मरके भी ना मरल कि ई अमर बनावेला
केहू जीयते भी ना जियल ई जियते मूवावेला
गज्जबके प्यार ह दिनरातके चैना उडावेला
कि लौकी सोझा सब कूछ भी ना फिर कूछ दिखपावेला ।।

कि शक्ती बा ई देहीया मे आ दिल लाचार भइलबा ।

श्याम सरार्फ
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