बदल गईल दुनियाँ , बदल गईल बिचार ।
दोषीके छोरके होता , निर्दोषी पर प्रहार ।।
जेकरा पर विश्वास बा उहे देत बारे धोका ।
निचे गिरावेके खाली खोज्त बारे मौका ।।
फैसनके नाम पर आधा देह रहता उघार ।
जेने देख ओने खाली पैसाके बाजार ।।
ईहा खाली होला बैमानीके व्यापार ।
कवनो कामके नईखे ई निकामा सरकार ।।
८ कलास पढावे खातिर मास्टर चाहिँ १२ पास ।
देश चलावे खातिर नेता बारे औँठा छाप ।।
पैसाके आगे ना बा इज्जतके ख्याल ।
जे बारे गल्ती , उहे बारे महान् ।।
लडकी सब केस छोट रखली लडका सब बढाके ।
ईहा सभे खुस बारे गरिबनके सताके ।।
सबके मांग पूरा होई खात बारे कसम ।
जितते सब मांग हो जात बारे दफन ।।
दोसराके नकल करके बढल जाता आगे ।
आपन संस्कार सब रह जाता पाछे ।।
घरपरिवार भुला जाता अईला पर मेहरारू ।
फिक्का बारे शाकाहारी भईला पर मास दारू ।।
महिनाके वाद भी उपरसे थप बा लुटाई ।
सही बात खोजला पर होला पिटाई ।।
दिन प्रती दिन बढ्त बारे महँगाई ।
बढाके महँगाई होता सबके भलाई ।।
लेखक – नन्दकिशोर साह
कालिका माई गाउँपालिका – १







