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माई (भोजपुरी कविता )

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नौ महिना राखेली माई अपना गर्भमे ।
गल्ती ना करे देली राख्के नजरमे ।।
बतिहर भरसे पोसके करेली तैयार ।
एहिसे त बारी माई महान् ।।

रहेली हमेसा बनके फरछाई ।
हवे जेकर आशिर्वाद दवाई ।।
बनके पहिला गुरु सिखावेली संस्कार ।
एहिसे त बारी माई महान् ।।

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ना बारे ईनका बिना जीन्दगीके आधार ।
खुदे दुख सहके देखावेली संसार ।।
उनके बिना मानव जीवन बा बेकार ।
एहिसे त बारी माई महान् ।।

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लेवेली माई सबके स्थान ।
जेकरा आगे फिक्का होले भगवान् ।।
ईहे हई हमनीके पहिचान ।
एहिसे त बारी माई महान् ।।

बनावेली खाना आगीतर जराके आपन खुन ।
खुदेअपने खाली छुछे रोटी नुन ।।
अनमोल बा उनकर गुण ।
एहिसे त बारी माई महान् ।।

राखेली हमेसा सबके सहेजके ।
आपन सुख , शान्ति सब परहेजके ।।
बहावेली हमेसा ममताके धार ।
एहिसे त बारी माई महान् ।।

लेखक - नन्दकिशोर साह, कालिका माई गाउँपालिका -१ {रविदास}

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