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जातीय योगदान के समावेशिता ही महापरब “छठ” के महानता आ विशेषता ह ।

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वीरगन्ज । छठ परब आस्था, निष्ठा आ विश्वास के महान परब ह ।
जातीय समावेशिता के उदाहरण आ जातीय विभेद न्यूनीकरण के परब ह लोक महापरब छठ । सनातनी परम्परा अनुसार प्राकृतिक पूजन के अलौकिक उदाहरण ह छठ परब ।

छठ बरतीन लोग यदि छठ करत बानी त प्राकृतिक पूजन सामग्री खरीद करें ख़ातिर विशेष ध्यान दी जेकरा कारण छठ परब बिधिवत रूपसे पूर्ण मानल गईल बा ।

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छठ परब खातिर रेडीमेट सामग्री किन रहल बानी जइसे बांस के दउरा आ सुपुली के जगह तामा भा पीतल के दउरा आ सुपुली त तनि ध्यान दी । छठ एगो जातीय समावेशिता के परब ह यी हरेक जातजाति के योगदान द्वारा ही पूर्ण मानल जाला ।

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छठ परब में :

डोम के द्वारा बाँस के बनावल छैटी, दउरा आ सुपुली
कोहार के माटी से बनल ढकना, खपरी, कलसा, दियरी आ कोशी
तेली मेहनत से निकालल गईल तेल
अहीर के द्वारा जामवाल गईल दूध, दही, घ्यू
कोइरी के उपराजल मुरई, आदि
नुनिया के नुन, पानवरिया के पान
माली के फुल, दर्जी के सिलाई
कपडीया के कपडा, धानुख के साठी धान
बनिया के समान, किसान के अर्धक पात
भा कानु हलुवाई द्वारा निर्मित मिठाई
के बिना छठ पूर्ण नामानल जाला……

छठ महापरब के सभे कोई के शुभकामना बा ।

लेखक : अशोक कुशवाहा

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